जन संख्या नियंत्रण कानून जल्दी से लागू हो/jansankhya niyantran kanoon jaldi laguho

 "जन संख्या नियंत्रण कानून जल्दी से लागू हो"

जन संख्या नियंत्रण कानून जल्दी से लागू हो/jansankhya niyantran kanoon jaldi laguho

प्रतिवर्ष 10 जुलाई जनसंख्या नियंत्रण दिवस पर सबको याद आता है कि देश में बढ़ रही जन संख्या की वजह से दिन ब दिन महंगाई और बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। उसी तरह इस साल भी आजकल जन संख्या नियंत्रण कानून का मुद्दा देश में गर्माया हुआ है। क्यूँकि जनसंख्या के मामले में भारत 1.35 अरब की आबादी के साथ विश्व में दूसरे पायदान पर है। अगर जल्दी कोई फैसला नहीं लिया गया तो कुछ समय में भारत इस मामले में पहले पायदान पर होगा। 

सरकार को इस मामले में दखल देने की जरूरत ही न पड़ती, अगर हर दंपत्ति देशहित में और सुखी परिवार की ख़ातिर स्वैच्छिक रुप से हम दो हमारे दो स्लोगन को अपनाते। बड़े परिवार देश की आबादी बढ़ाने के साथ परिवार के कमाने वाले मुखिया पर भी बोझ ड़ालते है। परिवार छोटा होगा तो जरूरतें कम हो जाएगी जो चीज़ें चार बच्चों को मुश्किल से मिलती है वो दो बच्चों को आसानी से हासिल होगी।

इस वर्ष विश्व की जनसंख्या 8 बिलियन तक पहुंच गई है। बढ़ती जनसंख्या के साथ ही गरीबी, असमानता, लिंग भेद और जलवायु परिवर्तन जैसे विषय भी चिंता का कारण हैं। यह बेहद आवश्यक हो गया है कि बढ़ती जन संख्या पर रोक लगाई जाए। जन संख्या नियंत्रित करने से देश की जनता को प्रदुषण, खराब सेहत, बेरोजगारी, अशिक्षा के साथ ही अन्य तमाम समस्याओं से निजात मिल सकता है। लोगों की वृद्धि होती है वहां उन्हें रहने के लिए अतिरिक्त जगह की आवश्यकता पड़ती है। जिसके कारण जंगलों तथा प्राकृतिक स्थानों का नाश किया जाता है और कांक्रीट के जंगल खड़े किए जाते है। बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण देश का आर्थिक विकास दर बाधित होता है। जनसंख्या वृद्धि का सबसे बड़ा कारण अशिक्षा का होना है। क्योंकि ज्ञान के अभाव में ही लोग अपने तथा देश के भले बुरे के बारे में दूरदर्शिता नहीं रख पाते।

किसी एक वर्ग या कोम पर ऊँगली उठाने से पहले बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए देश की आबादी क्यूँ बढ़ रही है उन सारे पहलुओं पर गौर करने की जरूरत है। बेशक एक वर्ग है जिनको देश की परिस्थितियों से कोई मतलब नहीं, परिवार बढ़ाना है और हर देश में अपनी कोम की आबादी बढ़ाकर राज करने की ख़्वाहिश है। साथ में देश में बाहर से दूसरे देशों से घुसपैठ कर रहे लोगों पर रोक लगाना भी बेहद जरूरी है। नेपाली, बांग्लादेशी और न जानें कहाँ कहाँ से अवैध तरीकों से लोग आ जाते है उस पर भी नज़र रखना बहुत आवश्यक है। नकली आधार कार्ड और नकली डाॅक्यूमेंटस के साथ तीन-चार बच्चें पैदा करके देश की आबादी बढ़ा रहे है।

साथ में लैंगिक भेदभाव वाली मानसिकता भी कहीं न कहीं आबादी बढ़ाने का कारण है। बेटे की चाह में दो तीन लड़कियां पैदा कर लेते है लोग। भले फिर चाहे घर के हालात खस्ता हो। 

बच्चें पैदा कर लेना बड़ी बात नहीं, बच्चों को अच्छी और आला दरज्जे की परवरिश देकर पालना बड़ी बात है। दस पिल्ले तो कुत्तों के भी पल जाते है। इतने बच्चे पैदा ही क्यूँ करने है जब आप उनको एक बेहतरीन ज़िंदगी देने के काबिल नहीं। जितनी अपनी हैसियत हो, कमाने की काबिलियत हो उस हिसाब से परिवार बढ़ाना चाहिए। 

हर एक सरकारी अस्पतालों में परिवार नियोजन के साधन बाँटे जाते है, सरकार चिल्ला-चिल्ला कर कह रही है छोटा परिवार सुखी परिवार। पर लोगों को न खुद के परिवार की पड़ी है, न पत्नी की सेहत की, न बढ़ती आबादी की वजह से देश में बढ़ रही मुसीबतों की। चार-पाँच बच्चों की लाईन लगा लेते है फिर महंगाई और बेरोजगारी के नाम पर सरकार को कोसते रहते है। जन संख्या नियंत्रण कानून जल्द से जल्द लागू होना चाहिए। दो से ज़्यादा बच्चें पैदा करने पर सज़ा की सुनवाई भी होनी चाहिए और जो इस कानून का उल्लंघन करते है उनको मिलने वाली सारी सुविधाएं बंद कर देनी चाहिए। कड़े नियम ही इस समस्या का हल है।

भावना ठाकर 'भावु' बेंगलोर


bolti zindagi साहित्य के लिए साहित्य को समर्पित बोलती ज़िंदगी e- Magazine To know more about me Go to Boltizindagi.com

0 Comments

Post a Comment

boltizindagi@gmail.com

Iklan Atas Artikel

Iklan Tengah Artikel 1

Iklan Tengah Artikel 2

Iklan Bawah Artikel