सच जिंदगी बोलती हैं. |Sach zindagi bolti hai

 सच जिंदगी बोलती हैं..... 

Sach zindagi bolti hai
Sach zindagi bolti hai 

ध्यान से सुनो जिंदगी बोलती हैं  

कभी हँसती कभी रोती हैं

नई नई सिख देकर पढ़ाती हैं

सच जिंदगी बोलती हैं 


सिंचन संस्कार उत्तम देती हैं

सच्चाई का तजुर्बा लिए जिंदगी खिलती हैं

सौम्यता की सौगात देकर जीना सिखाती है

सच जिंदगी बोलती हैं 


कई सुरों का संगम बांटती हैं  

कभी धून, कभी लय में नचाती है

संगीत के आलाप स्वरूप सजती है

उमंग की रंगत भर्ती है

सच जिंदगी बोलती है 


दर्द से बिलखती भी है

लड़खड़ाकर चलती भी है

हौसले की पंख धायल है

पर उचाई को छूना कैसे है

ऐसी उम्दा उम्मीद कायम करती है

सच जिंदगी बोलती है 


जीवन तो गहरा सागर है

विशाल अंबर जैसा तन्हा है

बंधन की गरिमा निभानी है

रिश्तों में 'जान' भरनी हैं

अपनों के खातिर संघर्ष करना हैं

सारी जिम्मेदारी बखूबी सिखाती हैं

सच जिंदगी बोलती हैं


 मुझमें फैली हैं तुझमें फैली है

अरे संसार की हर रचना उससे खिली हैं

वो कायनात से जुड़ी है

रब की बनाई रब ने संवारी हैं

करती जादूगरी हैं

सचमुच ऐ जिंदगी बोलती हैं 


डॉ.अल्पा. एच.अमीन

अहमदाबाद,  

गुजरात,.

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