Hamare Sanskar by sudhir srivastav

 हमारे संस्कार

Hamare Sanskar by sudhir srivastav


माना कि आधुनिकता का

मुलम्मा हम पर चढ़ गया है,

हमनें सम्मान करना जैसे

भुला सा दिया है।

पर ऐसा भी नहीं हैं कि

दुनियां एक ही रंग में रंगी है,

सम्मान पाने लायक जो है

उसे सम्मान की कमी नहीं है।

हम लाख आधुनिक हो जायें

पर हम सबके ही संस्कार भी

मर जायेंगे,

ऐसी वजह भी नहीं है।

हमारी परंपराएं कल भी जिंदा थीं

आज भी हैं और कल भी रहेंगी,

कुछ सिरफिरे भटक गये होंगे

यह मान सकता हूँ मगर,

विद्धानों की पूजा कल की ही तरह

आज भी हो रही है।

विद्धान पूजित था,है और रहेगा

विद्धानों की पूजा करने वालों की कमी

न कभी पहले ही थी और न ही आज है,

डंके की चोट पर ऐलान मेरा है

न ही कभी कमी होगी।

विद्वान पहले की तरह पूजा जाता है

आगे भी सर्वत्र पुजता ही रहेगा,

विद्धानों का मान,सम्मान,

स्वाभिमान कभी कम नहीं हुआ है

और आगे भी नहीं होगा।

◆ सुधीर श्रीवास्तव

       गोण्डा, उ.प्र.

Cp हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध कवि एवं शायर चन्द्र प्रकाश गौतम (सी.पी. गौतम) का जन्म 13 अगस्त सन् 1995 को उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जनपद के छीतकपुर गाँव में हुआ । इनकी प्रारम्भिक शिक्षा गाँव के ही प्राथमिक विद्यालय से शुरू हुई इन्होंने उच्च शिक्षा स्नातक की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से की तथा यहीं से हिन्दी साहित्य में परास्नातक की पढ़ाई भी की । स्नातक व परास्नातक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की है। चन्द्र प्रकाश गौतम की हिन्दी साहित्य में विशेष रुचि है । इन्होंने कई महत्वपूर्ण कविताओं एवं आलोचनात्मक लेखों का सृजना किया है , जो देश के विभिन्न राज्यों के दैनिक समाचार पत्रों , पत्रिकाओं में प्रकाशित है साथ ही इनकी कुछ रचनाएं भारत के अलावा अमेरिका में भी प्रकाशित हुई हैं Know more about me

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