बड़े चालाक हो मेरे प्रभु - सिद्धार्थ गोरखपुरी

 बड़े चालाक हो मेरे प्रभु 

बड़े चालाक हो मेरे प्रभु - सिद्धार्थ गोरखपुरी

बड़े चालाक हो मेरे प्रभु

हर गुत्थी सुलझाए रखते हो।

बस हमे ही जीवन मृत्यु के बीच

यूँहीं उलझाए रखते हो।


आदमी को ठोकर के बाद

पथ बोध कराया करते हो।

जब ठोकर देना होता है

तो क्रोध दिलाया करते हो।


सुख दुःख जीवन में ले आकर

समय का ज्ञान कराते हो।

क्या अथाह दुःख देकर के प्रभु

थोड़ा भी पछताते हो।


समय की मार से मानव को

समझाए रखते हो।

बस हमे ही जीवन मृत्यु के बीच

यूँहीं उलझाए रखते हो।


ठोकर पर ठोकर देकर के 

प्रभु कैसी दीक्षा देते हो।

समय बिपरीत जब होता है

तो कठिन परीक्षा लेते हो।


तुम्हारे सवालों का जवाब

समझ से परे होता है अक्सर।

तुम तो पूछ लेते हो प्रभु

ऐसे ही सवाल रह - रह कर।


सारे जीवों में मानव को 

प्रभु तुमने है बुद्धिमान बनाया।

खेल खेल गए बहुत बड़ा

प्रश्न न कोई आसान बनाया।


हम भी तुम्हारे बालक हैं 

अरे थोड़ी सी तो मया करो।

अब बहुत हो चुका सवाल जवाब

इस जीव पर भी दया करो।

- सिद्धार्थ गोरखपुरी

Cp हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध कवि एवं शायर चन्द्र प्रकाश गौतम (सी.पी. गौतम) का जन्म 13 अगस्त सन् 1995 को उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जनपद के छीतकपुर गाँव में हुआ । इनकी प्रारम्भिक शिक्षा गाँव के ही प्राथमिक विद्यालय से शुरू हुई इन्होंने उच्च शिक्षा स्नातक की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से की तथा यहीं से हिन्दी साहित्य में परास्नातक की पढ़ाई भी की । स्नातक व परास्नातक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की है। चन्द्र प्रकाश गौतम की हिन्दी साहित्य में विशेष रुचि है । इन्होंने कई महत्वपूर्ण कविताओं एवं आलोचनात्मक लेखों का सृजना किया है , जो देश के विभिन्न राज्यों के दैनिक समाचार पत्रों , पत्रिकाओं में प्रकाशित है साथ ही इनकी कुछ रचनाएं भारत के अलावा अमेरिका में भी प्रकाशित हुई हैं Know more about me

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