Musaladhar barish kavita by Anita Sharma

 मूसलाधार बारिश

Musaladhar barish kavita  by Anita Sharma


एक जमाना याद आया,

मूसलाधार बारिश देखी।

यादों के झुरमुट में बसी,

वही पुरानी यादें लौटी।

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लगातार बिन रूके तब,

गिरता था पानी।

रस्सी पर बिन सूखे ही,

लटका करते गीले कपड़े।

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एक जमाने के अंतराल में,

दोहराया प्रकृति ने मंजर।

घरों में कैद किया बारिश ने,

लबालब सड़कों में भरा पानी।

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वहीं कई घरों में हाजिरी दी,

पानी ने भरकर।

हुआ अस्त व्यस्त जनजीवन,

बिजली ने भी झटका मारा।

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अंधकार में शहर डूबा था,

गर्मी ने बेचैन किया।

आया सावन झूम कर ,

बदरा बरसे झूमकर ।

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बचपन में जो देख जिया था,

आँखे तरसा करती थी ।

मन में बसा जो चित्र था ,

बरसों बाद फिर जिया उसे।

**अनिता शर्मा झाँसी

**मौलिक रचना

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