Deep parv ka samman by Sudhir Srivastava
November 07, 2021 ・0 comments ・Topic: poem
दीपपर्व का सम्मान
दीपों की लड़ियां सजाएं
आइए दीवाली मनाएं,
उल्लास भरा त्योहार मनाएं।
एक दीप राष्ट्र के नाम भी जलाएं
भारतीयता के नाम भी एक दीप जलाएं
पर उन सैनिकों को न भूल जायें
जिन्होंने सरहद पर प्राण गँवाए,
उनके नाम का भी एक दीप जलाएं
साथ में एक दीप उन सैनिकों के लिए भी
जो सरहद की निगहबानी के कारण
दीवाली में घर न आ पाये,
जाने अनजाने हुतात्माओं के नाम भी
एक दीप श्रद्धा से जलाएं।
देश की खुशहाली, विकास
संपन्नता, संप्रभुता की खातिर
अपना दायित्व निभाएं,
कम से कम एक दीप तो जलाएं।
इतना भर करके न खुश हो जायें
अपने पड़ोस में किसी गरीब के
घर का अँधेरा मिटाएं,
दीवाली की खुशियों में
उसके घर भी जाकर
एक दीप जरूर जलाएं,
मिलकर दीवाली मनाएं।
अपने घर का अँधेरा तो
सभी दूर कर लेते हैं मगर,
हर किसी का घर हो सके रोशन
हर कोई ये हौसला दिखाए।
दीपपर्व सिर्फ़ दीप जलाने के लिए
भला कहां आता है?
सच तो ये है कि दीपपर्व
हर साल इसलिए आता है
कि हर घर हर कोना रोशन होगा
दीपपर्व तभी सार्थक होगा।
हर साल दीपपर्व मायूस होकर जाता है
अगले साल फिर कोने कोने में
बिखरे उजाले को देखने आता है,
दीपपर्व का सम्मान करें
एक एक दीप के साथ सब मिलकर
दीपपर्व का सम्मान करें।
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