Ek aur natwarlal by jayshree birmi

 एक और नटवरलाल 

Ek aur natwarlal by jayshree brimi


एक वो नटवरलाल था जिसमे ताज महल,सांसद भवन और न जाने क्या क्या बेच दिया था और कानून की पकड़ में आने का नाम न ले रहा था वैसा ही ये भी हैं।

कुछ दिन पहले ही अखबार में पढ़ा था इन कारनामों के बारे में जो केरला का किस्सा हैं।उसका नाम मोनसन मावुक्कल हैं और उम्र ५१ साल।वैसे तो गरीब परिवार से आने वाला एक आम इंसान हैं ये किंतु ईजी मनी के लालच में पहले छोटी मोटी हेराफेरी करता रहा।उसकी पत्नी शिक्षिका थी और वह उसके साथ इतुक्की जिल्ले के एक गांव में रहता था।वहां वह इलेक्ट्रिशन का काम करता  था ।और  भी छोटे मोटे काम कर लेता था।बाद में कोची में पुरानी कारों के ले– बेच का धंधा करने लगा। उसमें भी बेईमानी करता था और चोरी की कारें बेचता पकड़ा गया था।लेकिन अब उसने एक भ्रम जाल बिछाई थी।

अपनी वेबसाइट पर एक अलग ही पहचान बनाई थी उसने।जिसमे वह प्राचीन और दुर्लभ कृतियों का अंतरराष्ट्रीय व्यापारी था,विश्वशांति परिषद का सभ्य था,प्रवासी मलयालम फेडरेशन का प्रणेता था,पुरातत्व विज्ञान का मास्टर था,कॉस्मेटोलॉजी में भी पोस्ट डॉक्टरेट किया हुआ था, निकासकार, और मोटिवेशनल स्पीकर भी था, और यूट्यूबर भी था।

 कोची में एक बहुत बड़ा बंगला था जो उसने किराए पर ले रखा था।जिसके बाहर एक कारों का कारवां खड़ा था जिसमे महंगी से महंगी कारें थी।जिसमे बीएमडब्ल्यू, ऑडी,रेंजर रोवर, मर्सीडिज,बैक्सटर,रोल्स रॉयल और डॉज जैसी महंगी गाडियां थी।

  और एक म्यूजियम भी था उसी बंगले में, जिसमें सोने चांदी के प्राचीन डिजाइन वाले गहने, जो दिमाग को सन्न करदेते थे और विदेशियों को तो चकित करदेते थे।जिसे वे लोग बिना मॉल तौल के ले लेते थे।उसके खजाने में देखें तो, ईशु के वस्त्र जो वे पहनते थे उसका टुकड़ा,जुडास को दी गई रिश्वत के ३० सिक्के,पैगंबर साहब का बर्तन जिसमे वे खाना खाते थे,टीपू सुलतान का सिंहासन,राजा रवि वर्मा और द विंची के  चित्रकारी के असल चित्र,छत्रपति शिवाजी की भगवद गीता जो वे हमेशा अपने पास रखते थे,मोजिस जा अधिकारदंड,नारायण गुरु की लकड़ी, त्रावनकोर  महाराजा का सिंहासन,मैसूर पैलेस की ओरिजनल टाइटल डीड, दुनियां सबसे पहला ग्रामोफोन,बाइबल की सबसे पेहले  छपी कोपी, ये सब उसके धनिक ग्राहकों के लिए था।और छोटे ग्राहकों के लिए छोटी छोटी कलाकृतियां थी जो व्हेल मछली की हड्डी से बनी हुई थी,या हाथीदांत से बनी हुई थी।इन सभी की फोटो वह अपनी वेबसाइट पर रख छोटे छोटे ग्राहक ही नहीं बड़े बड़े राज करण  के लोग,व्यापारी,फिल्मी दुनियां की बड़ी बड़ी हस्तियां सभी को प्रभावित कर ठग लेता था।उसके ग्राहकों में पुलिस अधिकारियों का भी स्थान था।कई वीआईपी नेताओं ने तो उसके बंगले में स्थित प्राचीन सिंगासनों में शान से बैठ फोटो  भी खिंचवाई थी।कई पुलिस वालों को छोटी मोटी भेंटे दे उन्हे रिझा के रखता था।एक बड़े अफसर को तो ५५ लाख रुपए की हाथ घड़ी भेंट दी थी।इसी लिए पुलिस वाले की मीठी नजर की मेहर में उसका का धान्धा पनप रहा था।

 उसने अलग अलग ६ लोगों से अंतरराष्ट्रीय हीरों के व्यापार और उसके एंटीक के धंधे के लिए कुल २४ करोड़ जीतने रुपए का कर्जा लिया था।जब उन लोगों ने उसे कर्जा चुकाने के लिए कहा तो उसने सरकार में फेमा के तहत उसकी रकम को रोके रक्खे जाने का बहाना किया और एक बड़े बैंक का स्टेटमेंट  दिखया जिसमे काफी  बैलेंस था। उसने ये भी बताया कि प्रधानमंत्री से मिल वह अपनी मुश्किलों की चर्चा कर अपने पैसे छुड़वा लेगा।उसका एक पार्टनर भी था जिसे किसी ने कभी देखा नहीं था और न ही पुलिस उसे ढूंढ पाई हैं।ऐसे जूठ के सहारे वह अपने आप को बचा नहीं सका और उसके वही ६ लोग जिनसे कर्ज लिया था उन्होंने कानूनी कार्यवाही की और फिर सभी जो उसके साथ फोटो में   थे उनकी तो धीग्धी बंध गई,सब को कानुनी  कार्यवाही का डर लगने लगा।जिसमे लोकल पुलिस को छोड़ क्राइम ब्रांच ने कार्यवाही की, तब तथ्य सामने आए वे चौकाने वाले थे। हू इज हू की यादि में स्थान पाने वाले की करतूतें धीरे धीरे  सामने आने लगी।

उसकी सभी चीजें जो प्राचीन गहने हो या एंटीक फर्नीचर हो सभी नकली थे। व्हेल मछली की हड्डी या हाथीदांत से बने एंटीक उंट की हड्डी से बनवाएं थे किसी कारीगर से जिसे उसकी मजदूरी तक नहीं दी थी।अपना  बैंक स्टेटमेंट जो सभी को दिखा रहा था , उस  बैंक में उसका अकाउंट ही नहीं था।एक एक करके सारी कारस्तानियां  बाहर आने लगी उसका तंत्र जो जूठ की नीव पर खड़ा था वह ऐसा गिरा कि बात न पूछो।जूठ के पांव नहीं होते और वह पकड़ा तो गया लेकिन उसके संपर्क में आए लोगों की भी निंदे हराम हो गई थी।

  इसके अलावा उसके वहां काम करने वाली की १७ साल की बेटी के साथ दुष्कर्म का भी वह अपराधी था जो वह पकड़ा गया तब तक उसकी अस्मत लूटता रहा,उसने भी बाद में पुलिस केस किया था। 

अब बहुत सी धाराओं में कार्यवाही के इंतजार में जेल में बंद पड़ा शायद अपनी करनी के लिए पछता रहा हो!


जयश्री बिरमी
अहमदाबाद
( संकलित)

bolti zindagi साहित्य के लिए साहित्य को समर्पित बोलती ज़िंदगी e- Magazine To know more about me Go to Boltizindagi.com

0 Comments

Post a Comment

boltizindagi@gmail.com

Iklan Atas Artikel

Iklan Tengah Artikel 1

Iklan Tengah Artikel 2

Iklan Bawah Artikel