Dahej pratha story by Chanda Neeta Rawat

  दहेज प्रथा

Dahej pratha story  by Chanda Rawat


 गाजीपुर के एक छोटे से गाँव में एक किसान का संपन्न परिवार रहता था किसान का नाम काशी राम था और पत्नी रामवती थी किसान के दो भाई थे किसान के दो बच्चे और उसके भाई के दो बच्चे थे किसान काशी राम का घर खेती से ही चलता था उसी में उसका परिवार बहुत ही खुश खुशहाल जीवन जीता था उसने अपने पुत्र से अधिक प्रिय अपनी पुत्री लालमणि थी वह अपने बच्चों को बहुत प्यार से लालन-पालन करता था और अच्छी शिक्षा देता था प्रतिदिन लालमणि और रमेश स्कूल जाया करते थे लालमणि अपने परिवार में एक होने के कारण सभी को अधिक प्रिय थी नाजो से पली-बढ़ी लाल बनी देखते-देखते कुछ इस समूह में युवती हो गई सुंदर युवती बन गई काशी राम ने लालमणि के बचपन से ही उसके विवाह की तैयारी करने लगा था युवती लालमणि को देखकर काशी राम के मन में विचार आने लगे थे कि अपने ना जो लालमणि का हाथ पीले करने का समय आ गया है काशी राम प्रति दिन दुगनी मेहनत मजदूरी करता है कि वह अपनी पुत्री का विवाह अच्छे से संपन्न कर सके लालमणि के मन में अनेकों सपने जगह लेने लगे , परिवार के प्रति वह विचार करने लगी कि अब हमें नए जीवन में प्रवेश करना है सच्चे साथी के रूप में राजकुमार की कल्पना करने लगी की कोई हम सफर आएगा लाख सपने चलने लगे उसके मन में इधर काशी राम ने अपने वर्ग में लालमणि की शादी के बात का प्रस्ताव लेकर नाथूलाल के बेटे नंदू से उसका विवाह तय किया नाथूलाल बहुत ही लालची व्यक्तित्व का व्यक्ति था की उसकी पत्नी भी बहुत ही लालची थी उन्होने दहेज की मांग की थी।कशी राम ने कहा जो मुझ गरीबी मे जुडे़गा वह मै दुगां। तो उन लोगो ने सहमती जताई विवाह तैंय हो गया।काशी राम ने बेटी के विवाह के लिए अपनी ज़िंदगी भर की पूंजी लगाई और अपने खेत तक को बेच  दिया। बारात के स्वागत के लिए अनमोल फल फूल मंगवाएं, मासूम भोला भाला काशी राम ने बहुत ही प्यार से खुशी-खुशी पूरे गाँव वालों को बोला दिया पूरा गाँव दियो से जगमगा दिया। बारात का स्वागत सत्कार बहुत ही अच्छे से संपन्न किया ।काशी राम का परिवार बहुत ही खुश, लालमणि का विवाह संपन्न हो गया। विदाई के समय उसके बहुत ही भारी मन से लालमणि को विदा किया काशी राम में किसान था इसलिए उसने अपनी लाडो को केवल प्यार और दुलार के साथ उसे अपने ससुराल विदा किया था।नये जीवन के लाख ख्वाहिश लिए एक आँगन छोड़ सपने सजाये दुसरे  आँगन नयी दुल्हन आयी । कुछ ही समय बीते थे काशी राम को संदेश आता है कि लालमणि की मृत्यु हो गई! उसे गले में कपड़े बांधकर गला घोट दिया गया ! लालमणि का कसूर बस इतना था कि वह एक गरीब किसान की बेटी थी जो शादी में इज्जत सम्मान और प्यार अपने पिता के घर से लेकर आई थी मासूमियत का गला घोट कर उसके सारे एहसासों अरमानों का अंत कर दिया गया। हत्या कर दी गई चंद  पैसों के लालच में रूढ़ीवादी  विचारधारा से बंधी इस समाज की सोच कब तक चलेगी, ज़िंदगी और  मौत का खेल में लाख लालमणि बली  चढ़ती होगीं हर रोज,  बंद कर दो यह सब  इस खेल का अंत  करो , इस दीमक को जो खा रहा समाज को 

मृत्यो के बाद पिता गरीब करता भी क्या बदहवास सा हो गया सारे गाँव मे मातम सा छा गया !

नाम- चन्दा नीता रावत
पता-   लंगपुरा औरंगाबाद वाराणसी

Cp हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध कवि एवं शायर चन्द्र प्रकाश गौतम (सी.पी. गौतम) का जन्म 13 अगस्त सन् 1995 को उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जनपद के छीतकपुर गाँव में हुआ । इनकी प्रारम्भिक शिक्षा गाँव के ही प्राथमिक विद्यालय से शुरू हुई इन्होंने उच्च शिक्षा स्नातक की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से की तथा यहीं से हिन्दी साहित्य में परास्नातक की पढ़ाई भी की । स्नातक व परास्नातक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की है। चन्द्र प्रकाश गौतम की हिन्दी साहित्य में विशेष रुचि है । इन्होंने कई महत्वपूर्ण कविताओं एवं आलोचनात्मक लेखों का सृजना किया है , जो देश के विभिन्न राज्यों के दैनिक समाचार पत्रों , पत्रिकाओं में प्रकाशित है साथ ही इनकी कुछ रचनाएं भारत के अलावा अमेरिका में भी प्रकाशित हुई हैं Know more about me

0 Comments

Post a Comment

boltizindagi@gmail.com

Iklan Atas Artikel

Iklan Tengah Artikel 1

Iklan Tengah Artikel 2

Iklan Bawah Artikel